Breaking

Search This Blog

Thursday, November 26, 2020

यदि मैं प्रधानाध्यापक होता (250 Words)

निबंध : यदि मैं प्रधानाध्यापक होता 

कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि, काश! मैं प्रधानाध्यापक होता और अपने विद्यालय का संचालन अपने विचारों के अनुसार करता तो कैसा होता? इस सम्बन्ध में मेरे विचार कुछ इस प्रकार हैं-

विद्यालय के प्रधानाध्यापक के नाते सर्वप्रथम मैं अपने विद्यालय भवन की उपयुक्तता एवं सुंदरता पर ध्यान देता। छात्रों को बैठने के लिए उपयुक्त स्थान का प्रबंध करता। पुस्तकालय एवं वाचनालय कक्ष तथा बाल सभा के लिए उपयुक्त स्थान का चयन करता।

यदि मैं प्रधानाध्यापक होता (250 Words)
यदि मैं प्रधानाध्यापक होता (250 Words)

इस कार्य हेतु मैं 'शाला विकास समिति' का गठन करता, जिसमें गाँव के प्रमुख लोगों के सहयोग से विद्यालय भवन का विकास करता एवं भवन को सुन्दर स्वरूप प्रदान कराता। मेरा दूसरा कर्तव्य होता- छात्रों के लिए उत्तम शिक्षा की व्यवस्था। इस हेतु में मेरे साथी अध्यापक साथियों के साथ बैठकर योजना बनाता। विषय शिक्षण के साथ-साथ सामूहिक एवं पाठ्येत्तर प्रवृत्तियों को प्रमुखता देता। प्रति सप्ताह बाल-सभा के माध्यम से छात्रों की अभिव्यक्ति का विकास करता तथा प्रार्थना-स्थलीय कार्यक्रम के माध्यम से सामान्य ज्ञान, नैतिक शिक्षा एवं राष्ट्र-प्रेम को सुदृढ़ करता।


मेरा अगला विचार अनुशासन व व्यक्तिगत स्वास्थ्य से संबंधित है। मेरी मान्यता है कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन होता है। इस हेतु नियमित व्यायाम व स्वास्थ्य शिक्षा पर जोर देता। अपने कार्यकलापों से शाला की अनुशासन व्यवस्था को उत्तम बनाता। छात्र समस्याओं के बारे में छात्रों से खुलकर विचार-विमर्श करता तथा अध्यापक अभिभावक परिषद् का गठन करके प्रत्येक मास उनकी बैठक आयोजित करता। मेरी मान्यता है कि यदि शाला में इस प्रकार की व्यवस्था हो तो छात्र अधिक बुद्धिमान, चरित्रवान तथा देश-प्रेम से युक्त सेवाभावी बन सकेंगे। परन्तु यह केवल विचार हैं। अभी मेरी पढ़ने की आयु है, अभी मुझे पढ़-लिखकर बड़ा बनना है। यदि भविष्य में मैं इस पद पर पहुँच गया तो मैं अपनी कल्पना को मूर्त रूप दे सकूँगा, ऐसा मेरा विश्वास है।

No comments:

Post a Comment