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Sunday, November 8, 2020

दिवाली पर निबंध (Diwali Essay in Hindi)

दिवाली पर निबंध (Diwali Essay in Hindi)

भारतीय संस्कृति की झलक यहां के त्योहारों में दिखाई देती है। हमारे देश में अनेक धर्मों, संप्रदायों तथा संस्कृतियों का अद्भुत संगम है। इसलिए विभिन्न धर्मों से जुड़े अनेक त्यौहार जहां धूमधाम से मनाए जाते हैं तो हिंदुओं के त्योहारों में दीपावली का विशेष महत्व है।


दीपावली का अर्थ है दीपों की अवलि या पंक्ति दीपावली का त्यौहार एक त्यौहार ना होकर कहीं त्योहारों का समूह है जो कार्तिक मास की अमावस्या को आता है। दीपावली से 2 दिन पूर्व धनतेरस वाले दिन लोग नए बर्तन खरीदते हैं तथा इन्हें खरीदना शुभ मानते हैं। इस दिन धन के देवता कुबेर की पूजा होती है तथा संध्या के समय दीप जलाकर यमराज की पूजा भी इसी दिन होती है।


अगले दिन चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली मनाई जाती है। इसी दिन श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था तथा उसके कारगर में बंदी 16000 कन्याओं का उद्धार किया था।


अमावस्या के दिन दीपावली का पर्व मनाया जाता है रात में घरों में रोशनी की जाती है तथा लक्ष्मी पूजन होता है। बच्चे आतिशबाजी चलाकर आनंदित होते हैं। व्यापारी गण इसी दिन से अपना नया व्यापार शुरू करते हैं।


चौथे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। इसी दिन श्री कृष्ण ने इंद्र के कोप से ब्रज वासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था। इसी दिन अन्नकूट भी मनाया जाता है। अंतिम दिन भैया दूज का पावन पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाइयों को टीका लगाकर उनके दीर्घायु की मंगल कामना करती है।


जगमगाती रोशनी के त्योहार दीपावली के साथ अनेक ऐतिहासिक कथा पुरानी घटना से जुड़ी हुई है। इसी दिन श्री राम 14 वर्ष का वनवास काटकर रावण पर विजय प्राप्त करके सीता एवं लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। इसी दिन भगवान विष्णु ने नृसिंह का अवतार लेकर भक्त प्रहलाद की रक्षा की थी।


तथा उनके पिता हिरण्यकश्यप का वध किया था। इसी दिन सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद सिंह जी को बंधन मुक्ति मिली थी। आर्य समाज के प्रवर्तक महर्षि दयानंद जेनियो के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी और स्वामी रामतीर्थ ने इसी दिन मोक्ष प्राप्त किया था।


इस दिन लोग दीपक जलाते हैं जिनसे कीटाणुओं का नाश होता है दीपक के प्रकाश से अमावस्या की रात्रि भी पूर्णिमा में बदल जाती है। बाजारों घरों व दुकानों की सजावट अत्यंत आकर्षक होती है। लोग अपने इष्ट मित्रों के यहां मिठाई आदि का आदान प्रदान करते हैं।


लोग मानते हैं कि इस दिन धन की देवी लक्ष्मी नंगे पैर संसार में चक्कर लगाती है तथा उसे जो घर प्रकाशमान मिलता है, वही निवास करने लगती है। कुछ लोग इस दिन जुआ खेलकर अपनी किस्मत आजमाते हैं, परंतु इस कुरीति को हटाया जाना चाहिए। पटाखों और आतिशबाजी के अधिक प्रयोग से धन की हानि होती है तथा दुर्घटनाएं भी घटती है। अतः धन की अनावश्यक बर्बादी पर भी अंकुश लगाना हमारा कर्तव्य है।


दीपावली एक पवित्र त्यौहार है। अतः हमें दीपक जलाकर यह प्रतिज्ञा करनी चाहिए कि जिस प्रकार दीपक अंधकार को दूर करते हैं उसी प्रकार हम भी अंधविश्वासों, घृणा और बुराइयों के अंधकार को दूर कर दें तथा इस त्यौहार की पवित्रता को बनाए रखें।

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